डॉ. संजीव शर्मा योगाचार्य का संदेश
ॐ श्री हनुमते नमः, ॐ बागेश्वराय नमः
प्रिय साधकों एवं सनातन संस्कृति के उपासकों,
मनुष्य का वास्तविक उत्थान केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण, श्रेष्ठ संस्कार और निष्काम सेवा से होता है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक दिव्य कला है, जो हमें शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वय का मार्ग दिखाती है।
आज संसार को शक्ति से अधिक शांति, ज्ञान से अधिक विवेक और प्रगति के साथ संस्कारों की आवश्यकता है। आइए, हम योग को केवल अभ्यास न बनाकर अपना जीवन-दर्शन बनाएँ। प्रतिदिन प्राणायाम, ध्यान, जप, स्वाध्याय और सेवा के माध्यम से अपने जीवन को प्रकाशित करें।
भगवान श्री हनुमान हमें अटूट श्रद्धा, अदम्य साहस, विनम्रता, अनुशासन और गुरु-भक्ति का अमूल्य संदेश देते हैं। यदि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार लें, तो कोई भी बाधा हमें हमारे लक्ष्य से नहीं रोक सकती।
मेरा विश्वास है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर अनंत शक्ति का भंडार लेकर जन्म लेता है। योग उस शक्ति को जागृत करने का माध्यम है, और सेवा उस शक्ति का सर्वोत्तम उपयोग।
आइए, संकल्प लें—
"स्वस्थ तन, निर्मल मन, जागृत चेतना और करुणामय हृदय के साथ एक सशक्त, संस्कारित और आध्यात्मिक भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।"
जय श्री हनुमान।
जय गुरुदेव।
वसुधैव कुटुम्बकम्।
— डॉ. संजीव शर्मा योगाचार्य
संस्थापक एवं पीठाधीश्वर
श्री हिमालयन बालाजी योग धाम
संस्थापक – हिमालयन योग
योगाचार्य | आध्यात्मिक चिंतक | लेखक | समाजसेवी