श्री हनुमान योग वह दिव्य मार्ग

श्री हनुमान योग वह दिव्य मार्ग

श्री हनुमान योग सूत्र
लेखक: डॉ. संजीव शर्मा योगाचार्य
(संस्थापक – Himalayan Yoga)
मंगलाचरण
॥ श्रीगुरुभ्यो नमः ॥
॥ श्रीहनुमते नमः ॥
“ श्री हनुमान योग वह दिव्य मार्ग है जो भक्ति, शक्ति, सेवा, ज्ञान और आत्मसमर्पण को एक सूत्र में पिरोकर साधक को परमात्मा के निकट ले जाता है।”
हनुमान योग सूत्र – प्रथम सूत्र
“भक्ति ही शक्ति है, और शक्ति ही सेवा का आधार है।”
व्याख्या:
जैसे पवनपुत्र हनुमान जी ने अपनी समस्त शक्तियों को प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित किया, वैसे ही साधक को अपनी बुद्धि, बल, विद्या और कर्म को लोककल्याण तथा ईश्वर-सेवा में लगाना चाहिए। निष्काम सेवा से मन शुद्ध होता है, भक्ति से हृदय प्रकाशित होता है और योग से आत्मा परम चेतना से जुड़ती है।
श्लोक
बुद्धिर्बलं यशोधैर्यं निर्भयत्वमरोगता।
अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्॥
हनुमान योग के पंच स्तंभ
भक्ति – प्रभु के प्रति अटूट प्रेम।
सेवा – निःस्वार्थ कर्म और परोपकार।
साधना – योग, प्राणायाम और ध्यान।
समर्पण – अहंकार का त्याग।
साहस – धर्म और सत्य के लिए दृढ़ता।
आज का संदेश
“जहाँ विनम्रता है वहाँ कृपा है, जहाँ सेवा है वहाँ हनुमान हैं, और जहाँ हनुमान हैं वहाँ सफलता निश्चित है।”
🌺 जय गुरुदेव। जय श्री राम । जय हनुमान । जय बागेश्वर धाम। 🌺
– डॉ. संजीव शर्मा योगाचार्य
www.himyoga.org 

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