किसी की भावनाओं से खेलना केवल उसे ही नहीं, बल्कि खुद को भी भीतर से कमजोर कर देता है।
भावनाएँ विश्वास पर टिकी होती हैं, और जब कोई उस विश्वास को तोड़ता है, तो दिल ही नहीं, इंसान का नजरिया भी टूट जाता है।
इसलिए रिश्तों में ईमानदारी, संवेदनशीलता और सम्मान सबसे जरूरी हैं।
अगर इसे एक छोटे प्रेरणादायक विचार के रूप में कहना हो तो—
“किसी की भावनाओं से मत खेलो,
क्योंकि दिल खिलौना नहीं—है
और विश्वास एक बार टूट जाए,
तो फिर जुड़ता जरूर है, पर पहले जैसा नहीं रहता।” 🌸
जय गुरुदेव जय बागेश्वर धाम