" इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है "
ऊपर वाले के दरबार में हमारी डिग्रियां या दौलत नहीं, बल्कि हमारे कर्मों की गहराई देखी जाती है।
अक्सर हम बड़े काम करने के चक्कर में अपनों की मदद करना या किसी भूखे को खाना खिलाना जैसे छोटे-छोटे नेक काम भूल जाते हैं। याद रखिये, हनुमान जी की शक्ति उनकी भक्ति और सेवा भाव में थी, अहंकार में नहीं।