जिसका मन सच्ची भक्ति में टिक जाता है।

जिसका मन सच्ची भक्ति में टिक जाता है।


“भक्ति में स्थित मन ही भय से मुक्त होता है।”
अर्थ:
जिसका मन सच्ची भक्ति में टिक जाता है, उसके भीतर डर, चिंता और असुरक्षा धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। हनुमान जी की तरह जब साधक अपना अहं छोड़कर ईश्वर कार्य में लग जाता है, तब जीवन का भार हल्का हो जाता है।
योगिक संकेत:
भक्ति यहाँ केवल भाव नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण की मानसिक अवस्था है —
जहाँ मन भटकता नहीं, डर बनता नहीं, और कर्म रुकता नहीं।

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