बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि चेतना के जागरण का उत्सव है।
यह वह समय है जब प्रकृति हमें सिखाती है कि भीतर जमी शीतलता, जड़ता और अज्ञान को त्यागकर ज्ञान, साधना और सृजन की ओर बढ़ा जाए।
माँ सरस्वती का अवतरण हमें स्मरण कराता है कि सच्चा सौंदर्य वाणी की पवित्रता, विचारों की शुद्धता और कर्मों की साधना में निहित है।
योग का मार्ग भी यही है—मन को स्थिर कर, बुद्धि को प्रखर कर, जीवन को संतुलित बनाना।
इस बसंत पंचमी पर संकल्प लें कि
हम अपने जीवन को सतोगुणी बनाएं,
ज्ञान को केवल अर्जन न करें, बल्कि आचरण में उतारें,
और अपनी साधना से समाज में प्रकाश फैलाएँ।
ज्ञान ही बसंत है, और साधना ही उसकी सुगंध।
माँ सरस्वती की कृपा से जीवन सदा उल्लास, विवेक और शांति से परिपूर्ण रहे।
🌼 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼
डॉ संजीव शर्मा योगाचार्य
बागेश्वर धाम सरकार के शिष्य