कथा मनुष्य के जीवन में मार्ग-दर्शक है। कथा सूक्ष्म दोषों का भान कराती है। मनुष्य का उद्धार मात्र नाम-स्मरण से हो जाता है।
वेदान्त के सिद्धान्तों को समझना कठिन है, किन्तु नाम-स्मरण सरल है। नाम-जप की महिमा अनुपम है। श्री तुलसीदासजी ने नाम की महिमा का गान किया है।
मन्त्र महामनि विषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के। भाव कुभाव अनख आलस हूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ ॥
परमात्मा के ध्यान से मन की शुद्धि होती है। ध्यान में एकाग्रता न आए तो, नाम-स्मरण करो।
जय गुरुदेव जय बागेश्वर धाम